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PISA (Programme for International Student Assessment) Test

अंतरराष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम-(Programme for International Student Assessment-PISA)

PISA परीक्षण क्या है- What is PISA test ?

PISA (Programme for International Student Assessment ) एक अंतराष्ट्रीय स्तर पर छात्र मूल्यांकन परीक्षण है जो 15 वर्ष के विद्यार्थिओं के ज्ञान की क्षमता का आकलन के लिए तैयार की गयी है। PISA आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) द्वारा 1997 में शुरु किया गया था ,जिसमे विज्ञानं ,गणित ,और पठन के क्षेत्र में दुनिया भर में शैक्षिक प्रणाली की गुणवत्ता का आकलन किया जाता है। PISA मूल्यांकन इस बात की जांच करता है कि शिक्षा प्रणाली छात्रों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए कैसे तैयार कर रही है।

PISA यानि अंतरराष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम का उद्देश्य (Purpose)-

PISA परीक्षण का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के शैक्षिक प्रणाली की गुणवत्ता का आकलन करना है। यह 15 वर्षीय स्कूल के विद्यार्थियों के गणित ,विज्ञानं और पठन पर शैक्षिक प्रदर्शन को मापकर शैक्षिक प्रणालियों का मूल्यांकन करता है।  इसका उद्देश्य विभिन्न देशों की शिक्षा स्तर एवं नीतियों में सुधार करने के लिए तुलनात्मक आकड़ा प्रदान करना है। PISA इस बात का आकलन करता है कि 15 वर्ष के छात्रों ने किस हद तक ज्ञान और कौशल हासिल किया है जो समाज विकास के लिए आवश्यक है। PISA इस बात पर ध्यान केंद्रित करता है कि छात्र पढ़ने ,गणितीय और वैज्ञानिक साक्षरता के क्षेत्र में जीवन की चुनौतियो के लिए कितने तैयार है।

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2009 के बाद PISA परीक्षण यानि अंतरराष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम में भारत पुनः 2021 में भाग लेगा –

अब तक भारत ने PISA में केवल एक बार ही भाग लिया है। पहली बार भारत ने वर्ष 2009 में PISA परीक्षण में भाग लिया था।और भारत का स्थान कुल 74 देशों में 72वां था। उस वक्त के तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने भारत के निराशाजनक प्रदर्शन के लिए “संदर्भ के बाहर” सवालों को दोषी ठहराते हुए ,PISA परीक्षण का बहिस्कार किया था। परंतु ,हाल ही में मानव विकास मंत्रालय ने पुनः वर्ष 2021 में छात्र क्षमता के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यांकन (PISA) में भाग लेने का फैसला लिया है।भारत  2009 के बाद 2021 में ,विश्व स्तर पर प्रशंसित अंतरराष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन (PISA) कार्यक्रम में भाग लेगा। इस परीक्षा में दुनियाभर के 80 देशों के छात्र भाग ले रहे हैं। भारत 2021 की PISA परीक्षा में केंद्रीय विद्यालय समिति (KVS),नवोदय विद्यालय समिति (NVS) द्वारा संचालित विद्यालय तथा केंद्रशासित क्षेत्र चंडीगढ़ के विद्यालय भाग लेंगे।

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PISA में भारत की भागीदारी क्यों महत्वपूर्ण है ?-

जैसा कि हम जानते है, PISA test से विश्व भर के विभिन्न देशों की शिक्षा प्रणालियों के बारे में जानकारी मिलती है। इस टेस्ट का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किस प्रकार देश की शिक्षा प्रणाली में सुधार किया जा सकता है। अतः PISA में भाग लेने से भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शिक्षा प्रणाली की ताकत और कमजोरियों की बेहतर समझ मिलेगी और अपनी शिक्षा नीति को सुधरने में मदद मिलेगी। साथ ही विश्व के अन्य देशों के साथ मुकाबला करने के लिए प्रेरणा मिलेगी। PISA रैंकिंग में एशियाई देशों का हमेशा से वर्चस्व रहा है।

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PISA से जुड़ी महत्वपूर्ण तथ्य – 

  • PISA आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) द्वारा 1997 में शुरु किया गया था, जिसमे विज्ञानं ,गणित और पठन के क्षेत्र में दुनिया भर में शैक्षिक प्रणाली की गुणवत्ता का आकलन किया जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम (PISA) का आयोजन पहली बार 2000  में किया गया था ,तब से यह प्रत्येक तीन साल के अंतराल पर आयोजित की जाती है।
  • PISA के तहत मूल्यांकन के लिए किसी देश के 15 साल की आयु के छात्रों को शामिल किया जाता है जो स्कूली शिक्षा के सभी रूपों अथार्त सार्वजनिक ,निजी ,निजी-सहायता प्राप्त आदि का प्रतिनिधितव करते हैं।
  • PISA Test  मापता है कि छत्रो ने वे महत्वपूर्ण दक्षताएँ हासिल की है अथवा नहीं जो आधुनिक समाज में पूर्ण भागीदारी के लिए आवश्यक है।
  • आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) वर्ष 2021 में  अंतरराष्ट्रीय छात्र मूल्यांकन कार्यक्रम (Programme for International Student Assessment -PISA) का आयोजन करेगा।
  • 2021 में आयोजित होने वाले PISA Test में पंजीकृत देशों की सूचि में ब्राजील ,चीन (शंघाई और बीजिंग जैसे कुछ क्षेत्र ) तथा दक्षिण एशिया के थाईलैंड ,इंडोनेशिया ,मलेशिया, और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं।

Source: PIB

Neelam Mehta

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